Friday, October 15, 2010

बिहार के नेताओं की दबंगई : चुनाव से पहले चुनाव के बाद

बिहार , लोग कहते है ज्ञान की उत्पत्ति  यहीं  से हुई थी , इतिहास गवाह है गणित का जन्म यही हुआ था , कहने वाले तो ये भी कहते है बिहार नही रहता तो शायद विज्ञान आज स्थिति मे नही रहता । राजनैतिक सिद्धांतों  का गढ , सामाजिक आन्दोलन की शुरुआत  करने वाली यह पावन भूमि  कभी मगध के नाम से भी जानी जाती थी ।

और आज का परिदृश्य , हमे मनोज तिवारी का गाया हुआ एक गीत की याद दिलाता है

सारा जग जीत हम गईनी , घरवे मे हारि हो गईल ।

जी आज के राजनैतिक उठा पटक को देखने के बाद इस गीत का महत्व बढ जाता है । बिहार वो धरती जिसने भारत के प्रथम राष्ट्रपति को जन्म दिया , बिहार वो धरती जिसने लोकनायक जय प्रकाश को जन्म दिया । बिहार वो धरती जिसने महात्मा गाँधी को जमीन दी अपने कदम टिकाने के लिये , जिसने जनता दिया उनकी ताकत बनने के लिये और वो बिहार आज के चँद नेतावो के वजह से अपने अस्तित्व को तलाश रहा है ।

टिकट की गहमागहमी और फिर पिंड दान , अर्थी पे अपने नेतावो के पुतले ले जाना , अपने पार्टी के मुख्यालयो पे हमला करना , अपने नेतावो के घर पे हमला करना तो जैसे आम बात हो गई है । इन सब को देख कर एक नेता ने सही ही कहा है कि बिहार मे अगर विधानसभा की सीटो की संख्या 1000 भी कर दी जाय तो शायद यही मारामारी रहेगी ।

लेकिन इन सब मे एक प्रश्न उठता है कि आखिर क्यो ? ऐसा क्यो कर रहे ये नेता ? क्या इनका एक उद्देश्य केवल विधायक बनना है ? या फिर ये जनता की सेवा के लिये लालायित हो रहे है ?

शर्म तो तब आती है कि कुछ और लोग भी इनके साथ इन कार्यो मे जुट जाते है ।
 
बात यह आती है कि जो आज अपने टिकट के लिये इतनी मारामारी कर रहे है क्या वो बिहार के विकास के लिये , अपने क्षेत्र ( जहा से लडने के लिये टिकट मांग रहे है ) के विकास के लिये , बिहार की जनता के सुख और सम्मान के लिये ऐसे ही विरोध जता पायेंगे ?

नही कभी नही क्योकि इतिहास गवाह है ऐसे नेता केवल और केवल पोस्ट के लिये सत्ता के लिये सबकुछ करने को तैयार हो जाते है लेकिन जब बात जनता की सेवा के लिये आती है तब ये लोग कही एसी केबिन मे बैठ के मजे मे मजे का मजा लुटते है ।


आज जरुरत है जनता को ऐसे नेतावो के बहिषकार करने की , ऐसे नेतावो को इनकी जगह देखाने की , और अगर आज इनकी दबंगई पे जनता ने आवाज नही उठाया तो फिर कल बहुत देर हो जायेगी ....
लेखक- नवीन कुमार
 

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